यह संस्मरण वर्ष 1994 का है जब मैं एम बी.ए. डिग्री शासक करके बाम्बे स्थित एक प्रतिष्ठित प्राईवेट कम्पनी में कार्यरत था जहाँ सैलरी
एवं अन्य सुविधाएं भी ईश्वर की कृपा से बहुत ही आकर्षक थी। अचानक मैंने एक दिन रेलवे प्लेटफार्म पर एक विक्षिप्त भूखे को कूड़ेदान
से कुछ निकालकर खाते हुए देखा। शायद जहाँ वह भूखा जिन्दगी और भूख से जूझ रहा था, आज मुझे एहसास हुआ। उस दृश्य को देखकर
मैं बहुत समहित हो गया और उसी समय मन में बेसहारों का सहारा बनने की ईश्वरीय प्रेरणा प्राप्त हुई।
नौकरी छोड़कर मैं अपने पैतृका जनपद प्रतापगढ़ (उ0 प्र0) से गोरखपुर आ गया और बचत किये गए धनराशि से अनाथ भोजन सेना केंद्र की
स्थापना की तथा गरीब बच्चों हेतु एक कोचिंग की शुरुआत की।
मेरा मानना यह है कि इंसान को लर्न-अर्न-रिटर्न का भाव रखते हुए उस सृष्टि में जीवन-मापन करना चाहिए।
इसी मार्ग पर चलते हुए सन् 2009 में अपना आसरा फाउंडेशन - गोरखपुर की स्थापना की गई।
आज संख्या द्वारा जरूरतमंद लोगों हेतु अनाय भोजन सेवा मिशन, दान से कन्यादान मिशन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मिशन संचालित है
तथा बहर बार होम सेना का निर्माण एवं संचालन प्रस्तावित है। ताकि ना सीए कोई भूखा अपना...
इन सभी सेवा मिशन के लिए मैं इसर का धन्यवाद करता है।